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Monday, July 22, 2013

गुरु को समर्पित

आज गुरु पूर्णिमा को गुरु की महिमा को बखान करने के लिए कुछ पंक्तिया लिखी है ,वैसे तो जो भी लिखा है, यह कुछ भी नही है,उस गुरु की महिमा को बयां करने के लिए , लेकिन कोशिश की है, अपने गुरु श्री नीरज गोस्वामी जी से मैंने गजल कहना सीखा है, लेकिन गजल को भाव नही दे पाता  हूँ, आज ये गजल  और ये चंद पंक्तिया अपने गुरु श्री नीरज गोस्वामी जी को समर्पित करता हूँ, वैसे तो इस गजल में बहर के अलावा कुछ नही है, भाव कहने मुझे नही आते, ये पहली गजल है जो मैं कही लिख रहा हूँ,जो गलतियाँ हो आप सब लोग उन्हें माफ़ करके मेरा मार्गदर्शन करे , 

गुरु श्रधा है,

भक्ति है,

शक्ति है,

अलख है,

अगम है,

डूबते का सहारा है,

भोतिक जगत से

न्यारा है,

समुद्र की लहरों में 

एक किनारा है,

प्रेम रस है,

दया की मूरत है,

खुदा की नेमत है,

अलोकिक है,

गुरु की लीला 

अपरम्पार,

गुरु जैसा न कोई 

तारणहार ,,,,  


बहर २ २ २ २ २ २ २ २ 

गजल 

तन्हा जीवन ना जाया कर ,

तू  हमसे मिलने आया कर ,


दुनिया का हो तुझको कुछ गम,

इस कन्धे सर रख रोया कर,


बातो ही बातो में अब तू ,

मंजर इस दिल का खोला कर,


काली काली इन जुल्फों को,

अब तू,मत यूँ लहराया कर,


नीली मतवाली आँखों से,

शौर्य को ना तडफाया कर, 


17 comments:

  1. bhut khub.........gazal bahot achchi bni hai..bahot bhot bdhai

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  2. बहुत अच्छा गुरु अभिनन्दन!! और ग़ज़ल भी !!

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  3. Guru Abhinandan vandniy hai lekin Ghazal par abhi bahut kaam karna padega.Jald baazi n karen. Sahaz pake so miitha hoy...

    Dekhiye Matle men aapne Aaya aur Jaya kaafye liye hain, is hisaab se baaki ke shron men aapko aese kaafiye lene chahiyen jinke end men ya aaye jaise paya, khaya, gaya, chhaya, bhaya...aadi. Aapne ek sher men khola kaafiyaliya hai jo galat hai. Samjhe Janab. :-)


    Neeraj

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    1. आदरणीय नीरज गोस्वामी जी,आपने बिलकुल सही कहा,मैं गलती सुधार रहा हूँ,

      सोख अदाओ के बलबूते ,
      मेरे दिल पर छा जाया कर,

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  4. वाह जी बहुत ही अच्छी ग़ज़ल आपकी ग़ज़ल ने मन छु लिया …वाह

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  5. वाह जी बहुत ही अच्छी ग़ज़ल आपकी ग़ज़ल ने मन छु लिया …वाह

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  6. वाह ....बहुत सुंदर प्रस्तुती शोर्य जी

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  7. पहली गजल लिखने की बधाई, गजल के आपके गुरू श्री नीरज गोस्वामी जी सिद्ध साधक हैं आशा है उनके शिष्यत्व में आप अपने आपको इस विधा में और निखार पायेंगे. शुभकामनाएं.

    रामराम

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    1. बहुत बहुत आभार ताऊ

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  8. बहुत सुन्दर ह्रदय से निकले भाव।

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  9. गुरु के प्रति बहुत ही सुन्दर भाव.... बाकि गजल के बारे मैं मुझे कुछ मालुम नहीं है .... परन्तु गजलें पढ़ने में अच्छी लगी ... बधाई हो.....

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  10. बहुत सुन्दर...बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

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  11. सुंदर प्रस्तुति शौर्य जी..गुरु की महिमा शब्दों में समेटना बहुत मुश्किल है।।।

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