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Wednesday, July 24, 2013

पुस्तक चर्चा -१,,,,,,, मेरे गीत (सतीश सक्सेना )

आज आप सभी के सामने मैं एक पुस्तक चर्चा लेकर आया हूँ, ''मेरे गीत'' सतीश सक्सेना जी द्वारा लिखी गयी ये पुस्तक उनके गीतों का अनमोल संग्रह है , सतीश भाई को तो आप सभी  अच्छे से जानते ही है , पुस्तक में सतीश जी ने रिश्तों के महत्व पर बहुत जोर दिया है,हर रिश्ते का महत्व उन्होंने हमें बताया है, माँ बेटे का रिश्ता हो, पिता और पुत्री का,सास ससुर, बहु, भाई, बहन , कुछ पंक्तिया जो माँ के लिए लिखीं है


हम जी न सकेंगे दुनिया में,

माँ जन्मे कोख तुम्हारी से,   

जो दूध पिलाया बचपन में,

यह  शक्ति उसी से पायी है

जबसे तेरा आँचल छुटा  , हम हसना अम्मा भूल गये 

हम अब भी आंसू भरे , तुझे टकटकी लगाये बैठे है,


बुजुर्गो की व्यथा लिखते हुए कहा है की -

सारा जीवन कटा भागते ,

तुमको नर्म बिछोना लाते ,

नींद  तुम्हारी न खुल जाये 

पंखा झलते थे,सिराहने 

आज तुम्हारे कटु  वचनों से,मन कुछ डावाडोल हुआ है,

अब लगता है तेरे बिन मुझको,चलने का अभ्यास चाहिए,


 कुछ और पंक्तिया पढ़े ,  सुन्दरता से अपनी हर बात को रखा है,


रजनीगंधा सी सुन्दरता ,

फूलो की गंध उठे ऐसे ,

 उन भूली बिसरी यादो से,

ये गीत सजे अरमानो के,

मैं कभी सोचता कियो  मुझको, संतोष नहीं है जीवन में,

यह कियो उठती अतृप्त भूख ,सूनापन सा इस जीवन में,

रात भर सो गिले में ,

मुझको गले लगाती होगी,

अपनी अंतिम बीमारी में,

मुझको लेकर चिंतित होंगी,

बच्चा कैसे जी पायेगा ,वे निश्चित ही रोती होंगी,

सबको प्यार बाटने वाली,अपना कष्ट छिपाती  होगी,


कोई गोता खाये  बालो में,

कोई डूबा गहरे प्यालो में,  

कोई मयखाने में जा बैठा ,

कोई सोता गहरे ख्वाबो  में,

जलते घर माँ को छोड़ चले ,वापिस कोई कियो आएगा?

निष्ठुर लोगो की नगरी में,अब मेरे गीत कोन  गायेगा ?


 नव वधू  के लिए एक गीत है उसकी कुछ पंक्तिया पेश करता हूँ,भाव ही भाव है पूरे गीत में  

प्रथम प्यार का ,प्रथम पत्र है ,

लिखता निज मृगनयनी को,

उमड़ रहे जो भाव हृदय में,

अर्पित,प्रणय संगिनी को,

इस आशा के साथ,कि समझे भाषा प्रेमालाप की,

प्रेयसी पहली बार लिख रहा, चिठ्ठी तुमको प्यार की,

कुछ और पंक्तिया माँ के लिये लिखी है,  वो भी पढ़े,

सारे जीवन, हमें हसाया, 

सारे घर को स्वर्ग बनाया,

खुद तकलीफ उठा कर अम्मा,

हम सबको हसना सिखाया,

तुमको इन कष्टो में पाकर,हम जीते जी मर जायेंगे,

एक हसी के बदले अम्मा , फिर से रोनक आ जाएगी,


वैसे तो इस पुस्तक में बहुत कुछ है पढने को लेकिन सब यहाँ लिख भी  नहीं सकता , फिर भी कुछ और पंक्तिया जो मुझे बहुत अच्छी लगी आपके साथ साझा करता हूँ,,

कचरे वालो को बुलवाने 

बेटा भेजा कचरे पर 

इंटरव्यू देने को आये 

सड़े भिखारी कचरे से 

देवी जी का दिल भर आया हालत देखी कचरे की 

घर में उस दिन बनी ना रोटी यादें आई कचरे की


लेखक की विनती बहुत ही मजेदार है,


मेरे ऊपर धन  बरसा दे,

कुछ लोगो को सबक सिखा दे  

मेरा कोई ब्लॉग न पढता 

ब्लॉग जगत में भोले शंकर

 मेरे को ऊपर पंहुचा दे,

मेरा भी झंडा फहरा  दे 

मेरे आगे पीछे घुमे,दुनिया,

ऐसी जुगत करा दे ,,,,,,,


इस पुस्तक को मंगाने  के लिए ज्योतिपर्व प्रकाशन के प्रकाशक भाई अरुण चंद्र रॉय से सम्पर्क कर सकते है उनका फ़ोन नंबर है,09811721147 ,,,,,,,,,,,,,,,   सतीश जी से इस नंबर पर बात कर सकते है,,,,,,,,,,, 09811076451,

फ्लिप्कार्ट से मंगाने के लिए इस लिंक पर  जाये 


पेज संख्या -१२२,  मूल्य -१९९  

फिर मिलेंगे किसी और पुस्तक की चर्चा के साथ , तब तक के लिए विदा,,,,,,,,,,,,,











11 comments:

  1. bahot khub.....har shabd dil ko ko chu gya .....samajik bhavo ko bhi khubi se alfazo me utara hai...aap ne pustak padhi mai bhi mangvata hu aur meri aalmari ki shobha bdhata hu..satish bhai ko bhi shubhkamna...jald dusra pustak hme de.....dhanyvad

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  2. वाह ,जी बहुत बहुत खूब

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  3. बहुत बहुत खूब

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  4. बहुत सुंदर ......

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  5. सुंदर ...... बहुत खूब

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  6. सतिश जी की इस पुस्तक पर सुंदर लिखा है आपने.

    रामराम.

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  7. बहुत सुन्दर समीक्षा...

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  8. आदरणीय सतीश जी की लेखनी प्रभावित करती है..

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  9. धन्यवाद शौर्य ,
    आपको मेरे गीत पसंद आई , आभार आपका !

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    1. आपने लिखा ही इतना अच्छा है, न पसंद आने की तो बात ही नहीं है,

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