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Tuesday, June 25, 2013

पिता

मुझे पिता नही 
एक भगवान मिला है,
जीता जागता 
एक वरदान मिला है,
ऊँगली पकड़कर जिसकी,
चलना है सिखा हमने, 
जिन्दगी जीने की समझ ,
सीखी है जिनसे हमने ,
आकाश से भी ऊँचा है
कद जिनका,
गहराई है
बातो में उनकी,
अश्क न आने दिए
आँखों में मेरी ,
परवरिश
इतने प्यार से की है,
हर दर्द को समेट कर
अपने आगोश में,
खुशियों से भर दी है
जिन्दगी मेरी,
ऐसे पिता को शत शत नमन करता हूँ ,
ऐसे कई जन्म भी उनकी सेवा को अर्पण करता हूँ,

20 comments:

  1. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना है आपकी ...ये पंक्तियाँ दिल छू गयीं .

    आकाश से भी ऊँचा है
    कद जिनका,
    गहराई है
    बातो में उनकी,
    अश्क न आने दिए
    आँखों में मेरी

    वाह वाह वाह ...लिखते रहिये . वैसे पिता पर "अलोक श्रीवास्तव " जी की एक ग़ज़ल और स्व . ओम व्यास जी की एक कविता भी है जिन्हें जरूर पढ़ें/देखें /सुनें .....
    http://www.downvids.net/amma-babuji-by-alok-shrivastav-70989.html

    http://www.youtube.com/watch?v=e4Z9P_LzBM8

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  2. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति

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  3. पिता से प्रेम को दर्शाती बहुत ही सुन्दर रचना...

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  4. बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति

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  5. बहुत ही अच्छी लगी मुझे रचना........शुभकामनायें ।
    सुबह सुबह मन प्रसन्न हुआ रचना पढ़कर !

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    1. आपका बहुत आभार संजय जी ,

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  6. बेहतरीन रचना...!!

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    1. आपका बहुत आभार रंजना जी

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  7. पिता नहीं भगवान् मिला है
    ऐसा इक वरदान मिला है

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    1. सतीश जी बहुत आभार , बस ऐसे ही मेरा मार्गदर्शन करते रहे,

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  8. बेहतरीन रचना.

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  9. बहुत उम्दा प्रस्तुति,,,

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. आज में आप के ब्लॉग पर आया मुझे बहुत ही अच्छा लगा , आप ऐसे ही लिखते रहे ,शुभकामनायें

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