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Thursday, June 20, 2013

कसम-ए-तन्हाई

सपने टूटे , रास्ते भी छूटे ,

पनघट पर मटके भी टूटे ,


जो थे पास हमारे, वो भी छूटे ,

धीरे-धीरे दिल के अरमान भी टूटे ,


आँखों से आज आँसू भी छूटे ,

दिलो से दिल के तार भी टूटे ,


हाथो से आज हाथ भी छूटे ,

दिल के सुखद एहसास भी टूटे,


जुबाँ से लफ्जों के तीर भी छूटे ,

तुझसे मिलने के ख्वाब भी टूटे,


तेरी कसम-ए-तन्हाई से, आज हम भी छूटे ,

तेरी बातों से आज हम भी टूटे,


सपने टूटे , रास्ते भी छूटे ,

पनघट पर मटके भी टूटे ,




3 comments:

  1. अच्‍छा लगा आपके ब्‍लॉग पर आकर....आपकी रचनाएं पढकर और आपकी भवनाओं से जुडकर....
    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-


    संजय भास्‍कर
    शब्दों की मुस्कुराहट
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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    Replies
    1. आभार संजय जी , जरुर मुलाकात करूँगा आपसे आपके ब्लॉग पर

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  2. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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