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Wednesday, August 7, 2013

बात होती

भूल जाते है
बहुत सी बातो को 
लेकिन तेरी बातो को कभी 
भूलने की बात नहीं होती 

रहते थे व्याकुल 
मिलने को तुझसे
आज मिलकर भी तुझसे
कोई बात नहीं होती

गर मिल जाते तुम
आज मुझको तो
फिर उन पुरानी
मुलाकातों की बात होती

बेवफाई ना करते
अगर तुम मुझसे
तो आज भी होटो पर
तेरी वफ़ा की बात होती 

13 comments:

  1. बहुत खूब ..
    प्यारे भाव !!

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  2. बहुत गहन अर्थ, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  3. बहुत भावपूर्ण रचना...

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  4. बहुत सुन्दर .....बहुत खूब ..

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  5. भावपूर्ण ग़ज़ल !!

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  6. बढ़िया अभिव्यक्ति है ..
    बधाई !

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  7. ताऊ ब्लॉग से होते हुए पहली बार आप के ब्लॉग पर आना हुआ.

    अच्छी रचना है.
    .......
    [बुरा न माने तो एक सलाह दूँ -ब्लॉग के हेडर को छोटा कर लें.७४० लम्बाई और चौड़ाई २००-३०० से ज्यादा नहीं हो तो बेहतर .
    ब्लॉग खुलने में टाइम लेता है ब्लॉग पर धीरे--धीरे पहले फोटो लोड होती है फिर कहीं पोस्ट पर पहुँच पाते हैं.]

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    Replies
    1. आपका बहुत आभार आप यहाँ आये, आपने जो कहा है वो बदलाव कर दिया है

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    2. बहुत -बहुत धन्यवाद आप का जो आप ने मेरी बात का बुरा नहीं माना बल्कि अपेक्षित सुधार भी कर दिया है.
      एक और बात--
      आप के प्रोफाइल--[जो गूगल प्लस का है ] पर जब क्लिक करते हैं तो वहां पेज पर ढेरों लिंक दिखते हैं.
      वहाँ आया नया विसिटर कैसे जाने कि आप का ब्लॉग कौन सा है ?इस के लिए आप को गूगल प्लस के प्रोफाइल में ''अबाउट '' में जा कर अपने ब्लॉग का लिंक भी देना चाहिए.जिस से पढने वाले आप के लिखे तक पहुँच सकें.

      या सिर्फ अपने ही ब्लॉग के लिंक अपने प्लस प्रोफाइल के पेज पर रखने चाहिए.
      :)..

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    3. हाँ अपने ब्लॉग को किसी अग्रीग्रेटर में भी रजिस्टर करा लिजीये.मैं ने अपना ब्लॉग हमारीवाणी डॉट कोम पर रजिस्टर किया हुआ आप भी वहां रजिस्टर करा सकते हैं .इस से आप के ब्लॉग के बारे में और भी लोगों को मालूम चलेगा और आप को पाठक मिलेंगे.
      ये सभी 'सुझाव के कमेन्ट आप चाहें तो डिलीट कर सकते हैं.

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    4. अल्पना जी आपके सुझाव बहुत अच्छे है मैं डिलीट नहीं करूँगा, और आपके बताये हुए सुधार मैंने कर दिए है ,अब मेरे गूगल अबाउट में मेरा ब्लॉग भी मिलेगा

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  8. डॉ साहब
    लाज़वाब बात कही है,
    पर आजकल प्यार से ज्यादा उम्मीद कहाँ बची है।
    बस अपनी तरफ से कोई कसर बांकी न रह जाए,
    बस यही कोशिश रहनी चाहिए।
    बहुत खूब रचना आपकी

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  9. कभी बहुत सारी बातें होती हैं और कभी कुछ नहीं
    बहुत सुन्दर !

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