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Friday, October 18, 2013

रल्धू 3

आज सुबह सुबह रल्धू मेरे घर आ गया और बोलया भाई तू मेरे ऊपर फिर से कुछ लिखणे वाला है , मैंने कहा हा भाई लिख रहा हूँ , तो वो बोला हमेशा मेरा मजाक उड़ाते हो , कभी तो कुछ अर्थपूर्ण बात लिख दिया करो , मैंने कहा ठीक है भाई इस बार हास्य कम और व्यंग्य ज्यादा है , जो आजकल हमारी सोच हो गयी है उसके बारे में लिखने की कोशिश कर रहा हूँ , वैसे भी अगर  नहीं लिखा तो रल्धू कॉपीराइट का मुकदमा कर देगा मुझ पर ,  इस बार मैंने रल्धू को मुक्तक में लिखने का प्रयास किया है , आप सभी की प्रतिकिर्या की उम्मीद करता हूँ ...................

रल्धू की यारो देखो कैसी शामत आई
मेम तै करा जो ब्याह,घर में आफत आई
गिटपिट गिटपिट काटे ढेर कसूती अंग्रेजी
अरे यार  मेरे पल्ले या के जहमत आई

तडके तै साँझ ढले तक काम करे बिचारा
घर,बासन,कपडे,साफ़ करण मे मरे बिचारा
कधी पकावै आमलेट तो कधी कुक्कड़ कूँ
पैडी वाला मैनी वाला क्योर भी करे बिचारा

दूध दही की तो इस घर में थी बहती नदियाँ
अब तो उडे धुम्मा अर दारू की बहती नदियाँ
वो बोलया ब्याह कै ना लाइयो कधी मेम
देश की छोरी तै ही प्यार की बहती नदियाँ

डॉ शौर्य मालिक 

3 comments:

  1. आपकी इस उम्दा रचना को http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/ के शुक्रवार के अंक निविया की पसंद में शामिल किया जा रहा हैं कृपया अवलोकन के लिय पधारे .......धन्यवाद

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  2. बेहद शुक्रिया नीलिमा जी

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  3. रोचक और सराहनीय। कभी इधर भी पधारें
    सादर मदन

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